Sengol एक 5 फुट लंबा और 2 इंच मोटाई वाला एक गोल्ड प्लेटेड दंड है जो कि भारत के प्रधानमंत्री को भारत की आजादी के समय 1947 में दिया गया था
यह बनाया गया था वुमीडी बंगारू नामक एक ज्वेलर्स के द्वारा जो कि चेन्नई में काफी नामी है
यह जो दंड है यह हमारे भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित श्री जवाहरलाल नेहरू को 1947 में तंजावुर में श्री अम्बालावन देसीगर के दो सन्यासियों द्वारा दिया गया था जिनका मानना था कि स्वतंत्र भारत की सही मायने में नई भारतीय सरकार के पहले प्रमुख को "सत्ता और अधिकार के प्रतीक" के साथ प्रस्तुत किया जाना चाहिए।
इसकी कहानी कुछ इस प्रकार बताई जाती है कि भारत के अंतिम वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन ने नेहरू से पूछा था कि क्या सत्ता के हस्तांतरण को दर्शाने की कोई प्रक्रिया है।
बदले में नेहरू ने सी. राजगोपालाचारी, से परामर्श किया जो की भारत के अंतिम गवर्नर-जनरल थे, जिन्होंने बदले में थिरुवदुथुराई अधीनम राजदंड तैयार किया, जिसे शक्ति और न्यायपूर्ण शासन के पवित्र प्रतीक के रूप में देखा जाता है।
ऐसा बताया जाता है कि पंडित नेहरू ने इलाहाबाद म्यूजियम की निम रखी थी और 1200 से भी ज्यादा अपनी बेशकीमती चीजें म्यूजियम को डोनेट कर दी थी वहां रखने के लिए और वह चाहते थे कि उनका जितना भी कलेक्शन है वह सारा वहीं पड़ा रहे जिसमें यह दंड भी मौजूद था यह पिछले साल तक इलाहाबाद म्यूजियम में था फिर इसे नेशनल म्यूजियम में शिफ्ट किया गया और अब इसे दिल्ली लाया गया है कल के पार्लिमेंट प्रोग्राम के लिए जिसमें श्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा इसको पुनः नए संसद में स्थापित किया जाएगा
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